Thursday, June 11, 2009

बस यूँ ही

२५ दिन और ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदलने वाली है बस यूँ ही.


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Tuesday, May 5, 2009

देखो और समझो

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अगर जंगली जानवरों में श्रद्धा की भावना हो सकती है तो हम इंसानों में क्यों नहीं? परमेश्वर ने हमें अपने रूप में न की जानवरों के रूप में बनाया है तो ऐसा क्यों होता है की हम इसी पिता की तरफ श्रद्धा और प्रेम की भावना प्रकट में इतना कतरातें क्यों है? क्या ये करना शर्म की बात है?


Monday, April 13, 2009

आज़ादी......

"आज फिर जीने की तमन्ना है, आज फिर मरने का इरादा है." यह गाना हम सब बचपन से सुनते आ रहे है और शायद कभी कभी यह गाना अपनी कहानी भी कह जाता है. हम में से कोई नहीं जनता की आज और अब कितने लोग यह गाना गुन गुना रहे है और यह गाना जाने कितने लोगो की कहानी है आज. यह मेरी भी कहानी थी कल तक. अपने "थोड़े से आसमान" के खोज में, में आसमान बनाने वाले खुदवन को भूल गयी. कल रात जब नींद नहीं आ रही थी, में ने "The Passion of the Christ" बोहत सोचने के बाद लगा की मुझे मेरा "थोडा सा आसमान" आखिर मिल ही गया और व येशु मसीही में समाया है. वहां मिलेगी मुझे पूरी आज़ादी.  

आज़ादी 
आज़ादी येशु में, येशु ने मुझे दिया ऐसा व प्यार किया, खुद को बलिदान किया,
पापो में बंधे हुए थे हम, सूली पर आजाद किया.  

सुनलो यह सचाई, येही है आज़ादी!!

Monday, April 6, 2009

थोडा सा आसमान

सब की कोई न कोई चाह होती है. उन में से एक है की अपना भी एक आसमान हो या थोडा सा आसमान मिले जहाँ पर निडर हो कर हम उड़ सके. मेरु भी ऐसी एक चाह है. मुझे उड़ना है. बिन पंखो के उड़ना है. यह आसन नहीं पर सफ़र तोह करना है. यह सफ़र सिफर से शुरू होता है. देखते है कहाँ तक ले कर जायेगा और कहाँ कहाँ ले कर जायेगा और क्या क्या सिखायेगा.